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19 जून, 2014

गाँव में दो पीढ़ियों के बीच का धागा टूट गया

                                            रामाज्ञा शशिधर 


गाँव में दो पीढ़ियों के बीच का धागा लगभग टूट गया है.ताने को बाने का और बाने को ताने का पता नहीं है.नई पीढ़ी के लिए पुरानी पीढ़ी उस पुराने अबूझ गीत की तरह है जिसका रिमिक्स नहीं बन सकता.पुरानी पीढ़ी के लिए नई पीढ़ी डीजे का कानफोडू शोर है जो सिर्फ पुराने दिलों की धमनी को तोड़ रहा है. इसे समाजशास्त्री लोग 'जेनेरेशन गैप' कहते हैं लेकिन मेरे लिए यह बदलाव पुराने गाँव का नए बनते कथित गाँव से पूर्ण संबंध विच्छेद है.

01 अक्टूबर, 2011

कविता से पहले कवियों को दीमक के हवाले कर देना चाहिए


हमारा समय और आज की हिंदी कविता' पर राष्ट्रीय बहस बीएचयू के राधाकृष्णन सभागार में 24 सितम्बर 2011 को सात घंटे तक चलती रही.हिंदी कविता की दिशा,दशा और भविष्य को लेकर हुई .गोष्ठी से अनेक जरूरी सूत्र निकले हैं जो आज की कविता के गतिरोध,खूबी और ताकत को शिद्दत से रेखांकित करते हैं.रस्मी और फर्जी गोष्ठियों से अलग कविता से गंभीरता से प्यार करने वालों के बीच हुए वाद विवाद संवाद के सम्पादित अंश को आज की कविता के घोषणा पत्र के तौर पर श्रोताओं ने लेने की अपील की है..हम आपसे चाहते हैं कि इस बहस को आगे बढ़ाएं ताकि हिंदी में असली और नकली कविता,जनधर्मी और जनविरोधी कविता का नया पैमाना विकसित हो सके-माडरेटर