'इतिहास खुद को दोहराता चलता है' इस तथ्य की पुनरावृति इन दिनों कबीर,तुलसी,प्रेमचंद,प्रसाद,रामचंद्र शुक्ल,हज़ारी प्रसाद द्विवेदी,नामवर सिंह आदि के नगर में विचित्र काकटेल कल्चर के नवोत्थान के साथ चल रही है. समकालीन हिंदी कविता के कुख्यात एंटी हीरो विष्णु खरे द्वारा अगस्त २०१० में लिखे गए एक विवादित लेख के कुछ टुकड़े मणिकर्णिका के अकालमृत मुर्दे की तरह प्रेत बनकर बनारस में मंडरा रहे हैं.
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09 जनवरी, 2014
शुक्ल के घर में हिंदी के हुडुकलुलु
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