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21 जनवरी, 2014

नदी एक बारीक शिल्पकार होती है

        

नदी अब रेत का कच्छप अवतार है! 


हर साल जनवरी में १९ को रेत शिल्प में बदलती है. बनारस की दृश्यकला  के सैकड़ों छात्र इस शिल्प मेले के कूचीकार-करणीकार होते हैं.भूगोल होता है गंगा के बहरी अलंग का इलाका। कैनवास रेत का मैदान होता है.दूर तक फैला हुआ रेतीला पेपर,कार्डबोर्ड। 
         करणी,कुदाल,छलनी,चाकू,हाथ,पैर सब कूचीमय हो जाते हैं. एक दिन के लिए मीडिया की विराट भूख का यह मेला सुस्वादू आहार होता है.पहले विहार,फिर कैप्चर हुए दृश्यों का आहार।
       

16 जनवरी, 2014

कविता घाट:नया आपातकाल

(बनारसी पनेरी छन्नूलाल चौरसिया के लिए)
रामाज्ञा शशिधर

मगही पान पर कत्था चूना फेरते हुए
बात कतरता जमा देता है छन्नूलाल
कि डाक् साब अजब का था वह साल
जब दीवार लांघकर आया था आपके पास
जर्दा पान सुपारी के साथ
क्या गजब की लत थी जनाब